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    I.P.C. (भारतीय दंड सहिंता, 1860) Section-52 : Good faith(सदभावपूर्वक)

    I.P.C. (भारतीय दंड सहिंता, 1860)Section-52 : Good faith(सदभावपूर्वक)

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    भारतीय दंड सहिंता, 1860 की धारा 52 के बेयर एक्ट के अनुसार -

    Good faith (सदभावपूर्वक)-

    "Nothing is said to be done or believed in “good faith” which is done or believed without due care and attention."
    "कोई बात ‘‘सदभावपूर्वक’’ की गई या विश्वास की गई नही कही जाती जो सम्यक् सतर्कता और ध्यान के बिना की गई या विश्वास की गई हो।"
    टिप्पणी (Description)
    जब कोई व्यक्ति बिना दुर्भावना के कोई कार्य किसी के फायदे के लिए करता है और उस दौरान कोई घटना घट जाती है या कोई नुकसान हो जाता है, तो हम साधारण भाषा में ऐसा काग सकते है की उसने कोई कार्य सदभाव  पूर्वक किया है, जो भी घटना घाटी है या नुकसान हुआ है वो मात्र एक सहयोग था ा तो उस व्यक्ति को दोषी नहीं माना जायेगा ा इसका सबसे अच्छा उदाहरण भारतीय दंड सहिंता, 1860 की धारा 88   का Illustration (उदाहरण) है  जैसे कि -

    (1)क, एक शल्य चिकित्सक यह जानते हुए कि एक विशेष शल्यकर्म से  को, जो वेदनापूर्ण व्याधि से ग्रस्त है, मृत्यु करीत होने की संभाव्यता है, किन्तु य की मृत्युकारित करने का आशय न रखते हुए और सदभावनापूर्वक य के फायदे के आशय से य की सम्मति से, य पर शल्य कर्म करता है। क ने कोई अपराध नहीं किया है ।

    सदभावपूर्वक को और अच्छे से समझने के लिए भारतीय दंड सहिंता, 1860 की धारा 92, 93, के Illustration (उदाहरण) का भी अवलोकन सार्थक है, क्याकि कि भारतीय दंड सहिंता, 1860 में सदभावपूर्वक शब्द का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। 

    (2) य अपने घोडे़ से गिर गया और मूर्छित हो गया है। क, एक शल्य चिकित्सक का यह विचाार है कि  के कपाल पर शल्य क्रिया आवश्यक है। क, य का मुत्यु कारित करने का आशय न रखते हुए, किन्तु सदभावपूर्वक य के फायदे के लिए य के स्वयं किसी निर्णय पर पहुॅचने की शक्ति प्राप्त करने से पूर्व ही कपाल पर शल्यक्रिया करता है।  ने कोई अपराध नही किया।

    (3) क, एक शल्य चिकित्सक एक रोगी को सदभावपूर्वक यह संसूचित करता है कि उसकी राय में वह जीवित नहीं रह सकता है। इस आघात के परिणामस्वरूप उस रोगी की मृत्यु हो जाती है। ने कोई अपराध नहीं किया है, यद्यपि वह जानता था कि उस संसूचना से उस रोगी की मृत्यु कारित होना सम्भाव्य है। 




    Developed Principle by Case Laws (विभिन्न वादों द्वारा विकसित सिद्वान्त)
    ØBurden of Proof (सबूत का भार)
    ØArrest without Proper Inquery (बिना उचित जाॅच के गिरफ्तारीद)
    ØOperation by unskillful person (अकुशल व्यक्ति द्वारा शल्य क्रिया ) ()
    ØSuperstitious but rash act. (अंधविश्वासपूर्ण परन्तु उतावलेपन का कार्य)
    ØQuestioning Age of C.J.I. (भारत के मुख्य न्यायाधीश की आयु को चुनौती)

    Important Case Law (महत्वपूर्ण वाद) 

    1. देव ज्योति वर्मन(1957) 2 Cul. 181 - इस वाद में न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया कि यदि कोई विचार सम्यक् सर्तकता तथा ध्यान से इसकी सत्यता में विश्वास करते हुए बिना दोषपूर्ण प्रयोजन से प्रकट किया जाता है तो उसे सदभावपूर्वक कहा हुआ माना जाता है।

    2.एच. सिंह बनाम राज्य, AIR 1996, SC 97-  इस वाद में न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया कि सामान्य उपबन्ध अधिनियम में वर्णित ‘‘सदभावपूर्वक’’ शब्द की परिभाषा में ईमानदारी के जो तत्व है उन्हे संहिता में दी गई ‘‘सदभावपूर्वक’’ शब्द की परिभाषा में सम्मिलित नही किया गया है। 

    3. वक्स सू मीह चैधरी बनाम किंगAIR 1938 Rangoon 350 - इस वाद में न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया कि सदभावपूर्वक की अनुपस्थिति का अर्थ है, असावधानी या उपेक्षा।


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